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डिप्रेशन के प्रकार/Types of Depression
यदि आप हमेशा उदास, निराशाजनक, दुखी, थका थका महसूस करते हैं तो ये डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।
Let’s talk about depression (चलो डिप्रेशन के बारे में बात करते हैं) चूँकि डिप्रेशन के बारे में बात करना ही इसका सबसे अच्छा इलाज हैं।
हमारे देश में डिप्रेशन की सबसे बड़ी समस्या यही हैं की कोई भी इसके बारे में बात करना नहीं चाहता। आप अपनी Life में किसी ऐसे व्यक्ति या अगर आप खुद ऐसा Feel करते हैं तो अपना उदाहरण भी ले सकते हैं की कई बार आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा की आपने काफी लम्बे समय तक अपने जीवन में खुद को असहाय, दुखी ,उदास हमेशा Negative Feel करना जैसा महसूस किया होगा। लेकिन किसी दोस्त या फैमिली मेंबर ने आपको कभी ये suggest किया हो की कही आप डिप्रेशन में तो नहीं हो जिसकी वजह से आप ऐसा फील कर रहे हो ? और यह सुनने के बाद आपने अपने दोस्त या रिश्तेदारों को यही कहा होगा की नहीं यार बस मूड ऑफ(Mood off) हैं।
लेकिन Common mood off और डिप्रेशन दोनों में फ़र्क़ होता हैं और यदि आप डिप्रेशन के बारे में डिटेल में जानना चाहते हैं तो आप हमारे नीचे लिखे आर्टिकल को पढ़ कर जान सकते हैं :
डिप्रेशन सुनने में तो आम लगता हैं लेकिन आज के समय में यह एक बेहद गंभीर समस्या बन चुका हैं।
इसलिए आज मैं अपनी इस पोस्ट के माध्यम से में डिप्रेशन के प्रकार/Types of Depression के बारे में बताउंगी। चूँकि कई बार व्यक्ति को ये तो पता चल जाता हैं की डिप्रेशन हैं लेकिन यह किस टाइप का डिप्रेशन हैं यह नहीं जान पाते तो चलो जानते हैं डिप्रेशन के प्रकार/ Types of Depression के बारे में :
क्या आपको पता हैं Actress दीपिका पादुकोण को भी Major depression/Clinical depression था उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था की डिप्रेशन एक क्लिनिकल कंडीशन हैं और कोई इसे नियंत्रित नहीं कर सकता हैं उन्होंने कहा की डिप्रेशन क्या हैं और क्यों होता हैं इसे समझना जरूरी हैं ।
मेजर डिप्रेशन में आमतौर पर यह लक्षण पाए जाते हैं :
यदि आपके अंदर 2 हफ्तों तक 5 से ज्यादा लक्षण दिखाई दे तो आपको जल्द ही किसी मनोचित्किसक से संपर्क करना चाहिए। चूँकि शुरुआत में ही इसके लक्षण जान कर इसका इलाज जल्दी किया जा सकता हैं। अन्यथा ज्यादा अवधि बीत जाने पर इसका इलाज होने में काफी समय लग सकता हैं।
और दूसरी मानसिक स्थिति पैदा होती हैं उदासी और तनाव की ऐसे व्यक्ति का मन हमेशा दुखी रहता हैं, और उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता हैं। अगर हम Simple words में बोले तो ऐसा व्यक्ति अपने आपे से बहार हो जाता हैं, और उसका खुद पर ही Control नहीं होता हैं और बार बार उसकी मनोदशा बदलती रहती हैं। ऐसे व्यक्ति के मन में एक डर सा पैदा हो जाता हैं। वे बस अकेले रहना चाहता हैं और किसी को भी Face करने की हिम्मत उसमे नहीं होती हैं।
क्या आपको पता हैं की गायक हनी सिंह जो की दो सालो तक म्यूजिक इंडस्ट्री से गायब थे। उन्हें भी Bipolar Disorder हो गया था उन्हें लोगो से मिलने से डर लगता था। तभी अधिकतर लोगो को पता चला इस बीमारी के बारे में। हनी सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में ये भी कहा की किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने 20,000 की भीड़ के सामने प्रदर्शन किया है, मैं 4-5 लोगों का सामना करने से डर रहा था।
According to The National Institute of Mental Health,Bipolar Disorder " एक मस्तिष्क विकार जो मूड, ऊर्जा, गतिविधि स्तरों और दिन-प्रतिदिन के कार्यों को करने की क्षमता में असामान्य बदलाव का कारण बनता है " इसे “manic-depressive illness” मैनिक डिप्रेशन/Manic Depression भी कहा जाता है।
बाइपोलर डिप्रेशन के लक्षण/Symptoms of Bipolar Depression :
भारत में लोगो को इस बीमारी के प्रति ज्यादा नहीं मालूम हैं । भारत में बार बार मूड चेंज होने को एक Common Mood off मान लिया जाता हैं और सबसे बड़ी समस्या यह हैं की लोग मनोचिकित्सिक को दिखाने से डरते हैं। यह सोच कर की कही लोग उन्हें पागल न समझ ले।कुछ लोग तो डिप्रेशन के कारण आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं इसलिए लोगो को इसके प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी हैं।
सायकलोथमिक डिसॉर्डर/Mild Depression में एंटीडिपेंटेंट्स(Antidepressants) का भी कम प्रभाव पड़ता हैं (एंटीडिपेंटेंट्स एक तरह की दवा हैं जो जिसका उपयोग डिप्रेशन को रोकने या इलाज करने के लिए किया जाता हैं ) हालांकि,अधिक गंभीर मेजर डिप्रेशन अवसाद वाले लोगों के लिए, एंटीडिपेंटेंट्स अक्सर अच्छा प्रभाव करती हैं सायकलोथमिक डिसॉर्डर में ह्यपोमानिया भी देखा जाता हैं ह्यपोमानिया एक ऐसी मानसिक स्थिति हैं जिसमे व्यक्ति का मन बदलता रहता हैं।
माइल्ड डिप्रेशन/ सायकलोथमिक डिसॉर्डर में टॉक थेरेपी(Talk Therapy) जिसे मनोवैज्ञानिक परामर्श भी कहा जाता है। एक अच्छा उपचार प्रतीत होती हैं मैडिटेशन से भी इसका इलाज किया जा सकता हैं।
लोग अक्सर Persistent depressive disorder को पहचान नहीं पाते हैं, और उदास रहना अपने व्यक्तित्व का एक हिस्सा समझ लेते हैं। लेकिन अगर आप काफी लम्बे समय से उदास दुखी और किसी भी काम में मन नहीं लगा पा रहे हैं तो मनोचिकिस्तक से परामर्श जरूर लेना चाहिए, और यदि आप मनोचिकिस्तक के पास जाना नहीं चाहते तो आप अपने दोस्त जीवन साथी या कोई और जिस पर आप भरोसा करते हैं उनकी भी मदद ले सकते हैं।
महिलाओ में पहले बच्चे के जन्म के बाद Postmartum Depression के ज्यादा चान्सेस होते हैं चूँकि ये उनकी लाइफ का पहला अनुभव होता हैं। प्रेगनेंसी के बाद शारीरिक परेशानियों का तो ध्यान रखा जाता हैं लेकिन मानसिक स्थिति का ध्यान नहीं रखा जाता।
Postmartum Depression के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जैसे मूड स्विंग, उदासी, चिड़चिड़ापन, रोने की इच्छा होना और बच्चे को संभाल पाउंगी या नहीं इसकी चिंता होना, और ऐसे में उन्हें पारिवारिक सहयोग और इलाज की जरूरत होती है।अगर महिलाओ को पारिवारिक सहयोग मिल जाये तो व्यवहार में आया ये बदलाव कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है। इसके लिए दवाइयों की जरूरत नहीं होती। लेकिन, अगर लक्षण बढ़ जाएं तो इलाज जरूरी हो जाता है।
Postmartum Depression में महिलाये अपना बच्चा संभालना भी छोड़ देती हैं, चूँकि उनका स्वभाव इतना ज्यादा चिड़चिड़ा हो चुका होता हैं की उन्हें अपने बच्चे ही संभालना बोझ लगने लगता हैं। कई बार ऐसी महिलाये अपने बच्चों के लिए खतरनाक भी हो सकती हैं हालांकि, ऐसा बहुत कम मामलों में होता है।
भारत में Postmartum Depression को लेकर जागरूकता की बहुत कमी हैं । भारत में लोग बच्चे के जन्म के बाद महिलाओ के व्यवहार को बदलने को दूसरे तथ्यों से जोड़ लेते हैं। कोई इसे शारीरिक कमज़ोरी समझ लेता हैं तो कोई इसे ऊपरी हवा या भूत प्रेत का साया समझ लेते हैं। ऐसे में लोग डॉक्टर के पास जाने की वजह तंत्र मंत्र का सहारा ले लेते हैं। जो की सही नहीं हैं ना माँ के लिए और ना ही बच्चे के लिए।
इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज यही हैं की लोगो को इसके प्रति जागरूक किया जाये, और अस्पतालों में महिलाओ की प्रेगनेंसी के दौरान उनकी शारीरिक स्थिति के साथ साथ उनकी मानसिक स्थिति पर भी बात की जाये,ताकि महिलाओ के व्यवहार को समझ कर और डॉक्टरों, पारिवारिक सहयोग से बिना किसी दवा के इसका इलाज किया जा सके।
यदि Psychotic Depression अपनी अधिकतम सीमा तक पहुंच जाये तो ये व्यक्ति की जान तक भी ले सकता हैं।यदि आपके आस पास ऐसा कोई व्यक्ति हैं या आपके परिवार के व्यक्ति में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं जो गुमसुम रहता हैं, तर्कहीन बाते करता हैं, अकेले रहता हैं, तो सतर्क हो जाये और उन्हें जल्द ही किसी मनोचिकिस्तिक के पास ले जाये। ऐसे व्यक्ति को अकेले ना रहने दे उन्हें हँसाने की कोशिश करे।
Atypical depression वाले लोगों में अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ जाता है। इसमें मरीज का मेटाबोलिज्म बदल जाता हैं जिसके कारण फैट आसानी से बढ़ जाता हैं।
आमतौर पर सदियों के महीनों में प्राकृतिक रोशनी की कमी Seasonal affective disorder SAD का कारण बन सकती है। धूप शरीर में विटामिन डी बनाने के लिए भी ज़रूरी है। प्राकृतिक रोशनी से शरीर में सेरेटोनिन का स्तर बढ़ता है। यह मूड को नियमित करने वाला एक रसायन है।
विटामिन डी शरीर में सिरेटोनिन के उत्पादन में मुख्य भूमिका निभाता है, विटामिन डी की कमी से शरीर में सिरेटोनिन का स्तर गिरता है। इससे व्यक्ति दिन में कम एनर्जी और सुस्ती महसूस करता है।
घर में रोशनी बढ़ा कर,घर के बहार ज्यादा समय बिता कर,ज़्यादातर समय तक धुप में रह कर Seasonal affective disorder SAD से बचा जा सकता हैं।
मैं आशा करती हूँ आपको मेरी पोस्ट के माध्यम से डिप्रेशन के प्रकार/Types of Depression को समझने में मदद मिली होगी ।
यदि यह लेख आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया comment के माध्यम से मुझे ज़रूर बताएं और मेरी पोस्ट को अपने Friends के साथ Share भी कीजिये ।
आप सभी हमेशा स्वस्थ रहे यही "Depression जानकारी" की कामना हैं।
धन्यवाद ।
इसलिए आज मैं अपनी इस पोस्ट के माध्यम से में डिप्रेशन के प्रकार/Types of Depression के बारे में बताउंगी। चूँकि कई बार व्यक्ति को ये तो पता चल जाता हैं की डिप्रेशन हैं लेकिन यह किस टाइप का डिप्रेशन हैं यह नहीं जान पाते तो चलो जानते हैं डिप्रेशन के प्रकार/ Types of Depression के बारे में :
मेजर डिप्रेशन/Major depression/Clinical depression
Major depression/Clinical depression एक आम लेकिन सीरियस मूड डिसऑर्डर हैं। यह तब होता हैं जब उदासीन, निराशाजनक भावनाये,गुस्सा, चिड़चिड़ापन आदि आपका साथ जीवन में लम्बे टाइम तक न छोड़े। इसकी न्यूनतम अवधि 2 हफ्तों की होती हैं और इसकी अधिकतम अवधि महीनों, सालो तक भी रह सकती हैं। यह दैनिक गतिविधियों जैसे सोना खाना या काम करने के तरीकों को प्रभावित कर सकता हैं। यह इंसान के व्यवहार को प्रभावित करता है।
क्या आपको पता हैं Actress दीपिका पादुकोण को भी Major depression/Clinical depression था उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था की डिप्रेशन एक क्लिनिकल कंडीशन हैं और कोई इसे नियंत्रित नहीं कर सकता हैं उन्होंने कहा की डिप्रेशन क्या हैं और क्यों होता हैं इसे समझना जरूरी हैं ।
मेजर डिप्रेशन में आमतौर पर यह लक्षण पाए जाते हैं :
- उदासी और निराशाजनक,
- वजन कम या ज्यादा होना,
- किसी भी एक्टिविटी को एन्जॉय न कर पाना,
- नींद कम या ज्यादा आना,
- नकरात्मक विचार आना,
- शारीरिक लक्षण जैसे बदन दर्द सिरदर्द आदि,
- ध्यान केंद्रित न कर पाना,
- मन में आत्महत्या के विचार आना।
बाईपोलर डिसऑर्डर/Bipolar Depression/Manic Depression
बाइपोलर डिसऑर्डर/Bipolar Disorder एक तरह का मानसिक रोग हैं जिसमे व्यक्ति के अंतर्गत दो तरह की मानसिक स्थिति पैदा होती हैं। एक बहुत ज्यादा खुश रहने की जिसे सनक भी कहा जा सकता हैं। इस सिचुएशन में व्यक्ति में बहुत ज्यादा जोश उत्पन्न हो जाता हैं। ऐसा व्यक्ति मन में कुछ न कुछ कल्पना करता रहता हैं जैसे नए नए काम शुरू करने की कल्पना करना।और दूसरी मानसिक स्थिति पैदा होती हैं उदासी और तनाव की ऐसे व्यक्ति का मन हमेशा दुखी रहता हैं, और उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता हैं। अगर हम Simple words में बोले तो ऐसा व्यक्ति अपने आपे से बहार हो जाता हैं, और उसका खुद पर ही Control नहीं होता हैं और बार बार उसकी मनोदशा बदलती रहती हैं। ऐसे व्यक्ति के मन में एक डर सा पैदा हो जाता हैं। वे बस अकेले रहना चाहता हैं और किसी को भी Face करने की हिम्मत उसमे नहीं होती हैं।
क्या आपको पता हैं की गायक हनी सिंह जो की दो सालो तक म्यूजिक इंडस्ट्री से गायब थे। उन्हें भी Bipolar Disorder हो गया था उन्हें लोगो से मिलने से डर लगता था। तभी अधिकतर लोगो को पता चला इस बीमारी के बारे में। हनी सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में ये भी कहा की किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने 20,000 की भीड़ के सामने प्रदर्शन किया है, मैं 4-5 लोगों का सामना करने से डर रहा था।
According to The National Institute of Mental Health,Bipolar Disorder " एक मस्तिष्क विकार जो मूड, ऊर्जा, गतिविधि स्तरों और दिन-प्रतिदिन के कार्यों को करने की क्षमता में असामान्य बदलाव का कारण बनता है " इसे “manic-depressive illness” मैनिक डिप्रेशन/Manic Depression भी कहा जाता है।
बाइपोलर डिप्रेशन के लक्षण/Symptoms of Bipolar Depression :
- बिना किसी कारण वश अपने आप को अपराधी समझना,
- मन में बे वजह डर पैदा हो जाना,
- खुद को नुकसान पहुंचने की कोशिश करना,
- खुद पर कंट्रोल न कर पाना,
- भविष्य के लिए ज्यादा परेशान हो जाना,
- नशा या ड्रग्स लेना।
भारत में लोगो को इस बीमारी के प्रति ज्यादा नहीं मालूम हैं । भारत में बार बार मूड चेंज होने को एक Common Mood off मान लिया जाता हैं और सबसे बड़ी समस्या यह हैं की लोग मनोचिकित्सिक को दिखाने से डरते हैं। यह सोच कर की कही लोग उन्हें पागल न समझ ले।कुछ लोग तो डिप्रेशन के कारण आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं इसलिए लोगो को इसके प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी हैं।
सायकलोथमिक डिसॉर्डर/माइल्ड डिप्रेशन/Mild Depression
इसके लक्षण बेहद माइनर से होते हैं इसमें डिप्रेशन के जो सामान्य लक्षण होते है जैसे चिड़चिड़ापन, उदासी, तनाव,नींद कम या ज्यादा आना आदि।सायकलोथमिक डिसॉर्डर/Mild Depression में एंटीडिपेंटेंट्स(Antidepressants) का भी कम प्रभाव पड़ता हैं (एंटीडिपेंटेंट्स एक तरह की दवा हैं जो जिसका उपयोग डिप्रेशन को रोकने या इलाज करने के लिए किया जाता हैं ) हालांकि,अधिक गंभीर मेजर डिप्रेशन अवसाद वाले लोगों के लिए, एंटीडिपेंटेंट्स अक्सर अच्छा प्रभाव करती हैं सायकलोथमिक डिसॉर्डर में ह्यपोमानिया भी देखा जाता हैं ह्यपोमानिया एक ऐसी मानसिक स्थिति हैं जिसमे व्यक्ति का मन बदलता रहता हैं।
माइल्ड डिप्रेशन/ सायकलोथमिक डिसॉर्डर में टॉक थेरेपी(Talk Therapy) जिसे मनोवैज्ञानिक परामर्श भी कहा जाता है। एक अच्छा उपचार प्रतीत होती हैं मैडिटेशन से भी इसका इलाज किया जा सकता हैं।
डिस्थीमिक डिसऑर्डर/ Dysthymia Depression/Persistent depressive disorder
Persistent depressive disorder यह डिप्रेशन थोड़ा लंबी अवधि तक चलता हैं इसमें मरीज को 2 या 2 सालो से ज्यादा तक का डिप्रेशन अनुभव होता हैं।लोग अक्सर Persistent depressive disorder को पहचान नहीं पाते हैं, और उदास रहना अपने व्यक्तित्व का एक हिस्सा समझ लेते हैं। लेकिन अगर आप काफी लम्बे समय से उदास दुखी और किसी भी काम में मन नहीं लगा पा रहे हैं तो मनोचिकिस्तक से परामर्श जरूर लेना चाहिए, और यदि आप मनोचिकिस्तक के पास जाना नहीं चाहते तो आप अपने दोस्त जीवन साथी या कोई और जिस पर आप भरोसा करते हैं उनकी भी मदद ले सकते हैं।
पोस्टमार्टम डिप्रेशन(Postpartum depression)
माँ बनने के बाद महिलाओ में कई मानसिक और शारीरिक परिवर्तन देखे जा सकते हैं। कुछ परिवर्तन तो Common होते हो जो सभी महिलाओ में होते हैं लेकिन कुछ परिवर्तन चिंता का कारण बन सकते हैं। जैसे मुड़ स्विंग चिड़चिड़ाहट या बेचैनी,अधिक चिंता, डर सताना,आत्महत्या के विचार आना आदि इस स्थिति को पोस्टमार्टम डिप्रेशन/Postmartum Depression कहा जाता हैं।महिलाओ में पहले बच्चे के जन्म के बाद Postmartum Depression के ज्यादा चान्सेस होते हैं चूँकि ये उनकी लाइफ का पहला अनुभव होता हैं। प्रेगनेंसी के बाद शारीरिक परेशानियों का तो ध्यान रखा जाता हैं लेकिन मानसिक स्थिति का ध्यान नहीं रखा जाता।
Postmartum Depression के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जैसे मूड स्विंग, उदासी, चिड़चिड़ापन, रोने की इच्छा होना और बच्चे को संभाल पाउंगी या नहीं इसकी चिंता होना, और ऐसे में उन्हें पारिवारिक सहयोग और इलाज की जरूरत होती है।अगर महिलाओ को पारिवारिक सहयोग मिल जाये तो व्यवहार में आया ये बदलाव कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है। इसके लिए दवाइयों की जरूरत नहीं होती। लेकिन, अगर लक्षण बढ़ जाएं तो इलाज जरूरी हो जाता है।
Postmartum Depression में महिलाये अपना बच्चा संभालना भी छोड़ देती हैं, चूँकि उनका स्वभाव इतना ज्यादा चिड़चिड़ा हो चुका होता हैं की उन्हें अपने बच्चे ही संभालना बोझ लगने लगता हैं। कई बार ऐसी महिलाये अपने बच्चों के लिए खतरनाक भी हो सकती हैं हालांकि, ऐसा बहुत कम मामलों में होता है।
भारत में Postmartum Depression को लेकर जागरूकता की बहुत कमी हैं । भारत में लोग बच्चे के जन्म के बाद महिलाओ के व्यवहार को बदलने को दूसरे तथ्यों से जोड़ लेते हैं। कोई इसे शारीरिक कमज़ोरी समझ लेता हैं तो कोई इसे ऊपरी हवा या भूत प्रेत का साया समझ लेते हैं। ऐसे में लोग डॉक्टर के पास जाने की वजह तंत्र मंत्र का सहारा ले लेते हैं। जो की सही नहीं हैं ना माँ के लिए और ना ही बच्चे के लिए।
इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज यही हैं की लोगो को इसके प्रति जागरूक किया जाये, और अस्पतालों में महिलाओ की प्रेगनेंसी के दौरान उनकी शारीरिक स्थिति के साथ साथ उनकी मानसिक स्थिति पर भी बात की जाये,ताकि महिलाओ के व्यवहार को समझ कर और डॉक्टरों, पारिवारिक सहयोग से बिना किसी दवा के इसका इलाज किया जा सके।
सायकोटिक डिप्रेशन/Psychotic Depression
सायकोटिक डिप्रेशन/Psychotic Depression मेजर डिप्रेशन का ही एक प्रकार हैं जिसमे आपके अंदर ऐसी भावना पैदा हो जाती हैं की आप किसी काम के नहीं हैं। इसमें उन्हें ऐसा आभास होता हैं ऐसी आवाज़े सुनाई देती हैं की वे जीवन में असफल हैं, और सब लोग उन पर हँस रहे हैं ऐसे लोग तर्कहीन बात करते हैं। इसमें सच्चाई से अनजान रहना ,मतिभ्रम होना,किसी भी बात का आभास होना जो की हैं ही नहीं जैसी मनोदशा शामिल रहती हैं।यदि Psychotic Depression अपनी अधिकतम सीमा तक पहुंच जाये तो ये व्यक्ति की जान तक भी ले सकता हैं।यदि आपके आस पास ऐसा कोई व्यक्ति हैं या आपके परिवार के व्यक्ति में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं जो गुमसुम रहता हैं, तर्कहीन बाते करता हैं, अकेले रहता हैं, तो सतर्क हो जाये और उन्हें जल्द ही किसी मनोचिकिस्तिक के पास ले जाये। ऐसे व्यक्ति को अकेले ना रहने दे उन्हें हँसाने की कोशिश करे।
एटिपिकल डिप्रेशन (Atypical depression)
यह डिप्रेशन ज्यादातर युवाओं में पाया जाता हैं इसमें थकान, स्ट्रेस या फिर मेटाबोलिज्म जैसे लक्षण पाए जाते हैं।Atypical depression वाले लोगों में अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ जाता है। इसमें मरीज का मेटाबोलिज्म बदल जाता हैं जिसके कारण फैट आसानी से बढ़ जाता हैं।
मौसमी प्रभाव विकार/ सीज़नल डिप्रेशन/Seasonal affective disorder SAD
मौसमी प्रभाव विकार/Seasonal affective disorder SAD जो बाईपोलर डिसऑर्डर का एक प्रकार है, जो साल के एक ही समय में होता है। यह मौसम के बदलने के कारण होता हैं, और यह ज़्यादातर सर्दियों के मौसम में होता हैं। क्योंकि सदियों में सुबह की शुरुआत देर से होती हैं और शाम जल्दी हो जाती हैं। जिसके कारण व्यक्ति को धुप की रोशनी कम मिलती हैं,और धुप कम मिलने से शरीर की जैविक घड़ी(सिरकाडियन रिदम ) प्रभावित होती हैं तो इस कारण व्यक्ति में सीज़नल डिप्रेशन हो सकता हैं।आमतौर पर सदियों के महीनों में प्राकृतिक रोशनी की कमी Seasonal affective disorder SAD का कारण बन सकती है। धूप शरीर में विटामिन डी बनाने के लिए भी ज़रूरी है। प्राकृतिक रोशनी से शरीर में सेरेटोनिन का स्तर बढ़ता है। यह मूड को नियमित करने वाला एक रसायन है।
विटामिन डी शरीर में सिरेटोनिन के उत्पादन में मुख्य भूमिका निभाता है, विटामिन डी की कमी से शरीर में सिरेटोनिन का स्तर गिरता है। इससे व्यक्ति दिन में कम एनर्जी और सुस्ती महसूस करता है।
घर में रोशनी बढ़ा कर,घर के बहार ज्यादा समय बिता कर,ज़्यादातर समय तक धुप में रह कर Seasonal affective disorder SAD से बचा जा सकता हैं।
मैं आशा करती हूँ आपको मेरी पोस्ट के माध्यम से डिप्रेशन के प्रकार/Types of Depression को समझने में मदद मिली होगी ।
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आप सभी हमेशा स्वस्थ रहे यही "Depression जानकारी" की कामना हैं।
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7 Comments
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ReplyDeletethanks please stay connected at depression jankari.
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ReplyDeletethanks please stay connected at depression jankari.
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ReplyDeleteThank you so much.Your words means a lot to me for motivating me to write this stuff. please stay connected at depression jankari.
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